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Saturday, 10 April 2010

"सपनों की एक दुकान"

आओ बच्चो विचारों का बनायें एक मकान
उसमें खोलें सपनों की एक दुकान
फिर उन सपनों में चुन-चुन कर डालें जान
जो ला सकें सबके ओंठों पर मुस्कान
इसी तरह हम उड़ें एक ऊँची-श्रेष्ठ उड़ान
और बनायें इस जग में अपनी सुंदर सी पहचान.

Tuesday, 30 March 2010

आओ बनायें अपना मध्य प्रदेश

आओ बनायें अपना मध्य प्रदेश
जय देश,जय देश,जय देश
यही है जनता का जनादेश
आओ बनायें अपना मध्य प्रदेश
सब तक पहुचाएं  यही सन्देश
सम्रद्ध करें स्वदेश
बनाकर स्वर्णिम मध्य प्रदेश
जय देश,जय देश,जय देश
स्वराज,न्याय,विकास ,
समता,सुशासन ,लोकतंत्र का
अपनी अंतरात्मा में भर दें निर्देश
ताकि ऐसी सम्रद्धि हो मेरे प्रदेश की
जो गूँज उठे विदेश
आओ बनायें अपना प्रदेश
मध्य प्रदेश,जय देश,जय देश,जय देश.
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इच्छाओं की अठखेलियाँ

मन की भूलभुलैया में
इच्छाओं की अठखेलियाँ
गढ़ती-बुनती झूठे सपने
किन्तु यथार्थ के एहसास के साथ
और तारतम्य में विकृत हो जाता
आत्मविश्वास,व्यक्तित्व, व विचारधारा
निकृष्ट बुद्धि की दूषित शराब के साथ
अवचेतन के आँगन में
पैर पसारती इच्छायों की दुर्गन्ध
तहस-नहस करती मन के पर्यावरण को
बदल देती आत्मा के आवरण को
और शेष रह जाता जीवन के कलरव में
खदबदाता एक विषाद.
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Friday, 20 March 2009

नवोदय विद्यालय

नवोदय विद्यालय
दिव्य-दीप की चिंगारी से ज्ञान की ज्योत बिखेरी है ,
संगीत के सात सुरों से अमृत-रस धार निचोडी है ।
उपवन से कलियाँ चुनकर फूलों की खुशबू महकाई है ,
नवोदय विद्यालय ने इसी तरह न जाने कितनों की किस्मत चमकाई है ।
आकाश ओड़कर सोने वालों कों रत्न -गर्भ की राह दिखाई है ,
जीवन की मुश्किल घडियों में इसने नई दिशा बताई है ।
नवोदय विद्यालय ने इसी तरह न जाने कितनों की किस्मत चमकाई है ।
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Thursday, 22 May 2008

DO KAIDI

"दो कैदी,
स्वतंत्रताओं की दीवारों के भीतर, दो कैदी
यथार्थ को संभावनाओ से धकेलते, दो कैदी
घर की चार-दीवारी को स्वतंत्रता का बन्धन मानते
छत को आकाश बताते दो कैदी
सिद्धांत और व्यवहार को मिलाने की चाहत मैं छितिज
की ओर ताकते दो कैदी
कर्म से भाग्य और भाग्य से कर्म तराशते
दो कैदी
वाद एवं प्रतिवाद से संवाद का रूप अखतियार
करते दो कैदी
आज के बन्धन मैं कल की स्वतंत्रता को सीचते
दो कैदी
कल और कल मैं अपना आज समेटते, दुख को सुख से
एवं म्रत्त्यु से अमरत्व जोड़ते.............. दो कैदी."
( मनीष कुमार पटेल )
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